इलाहाबाद: युनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के नामांकन में जमकर चले बम और गोलियां, शहर में दहशत

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बम और गोलियां चलने के दौरान युनिवर्सिटी कैम्पस से लेकर बाहर सड़कों तक अफरा-तफरी मची रही. युनिवर्सिटी कैम्पस के बाहर चारों तरफ बम का धुंआ नजर आ रहा था तो साथ ही फायरिंग की आवाज़ सुनाई दे रही थी.

इलाहाबाद: पूरब का आक्सफोर्ड कही जाने वाली इलाहाबाद सेन्ट्रल युनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के लिए आज हुए नामांकन के दौरान जमकर हंगामा हुआ. उम्मीदवारों के समर्थकों ने इस मौके पर जमकर देसी बम फोड़े और दर्जनों राउंड हवा में गोलियां चलाईं. बम और गोलियां चलने के दौरान युनिवर्सिटी कैम्पस से लेकर बाहर सड़कों तक अफरा-तफरी मची रही. युनिवर्सिटी कैम्पस के बाहर चारों तरफ बम का धुंआ नजर आ रहा था तो साथ ही फायरिंग की आवाज़ सुनाई दे रही थी.

राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि बमबाजी और फायरिंग में किसी को चोट नहीं आई. इस दौरान युनिवर्सिटी के बाहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और हर तरफ दहशत का माहौल नजर आया. छात्रों और उनके समर्थकों द्वारा की जा रही बमबाजी और फायरिंग के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आया.

इलाहाबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी में छात्रसंघ का चुनाव पांच अक्टूबर को होना है. चुनाव के लिए आज नामांकन की प्रक्रिया पूरी कराई गई. शाम चार बजे जैसे ही नामांकन ख़त्म हुआ, छात्रसंघ भवन से लेकर बाहर की सड़कों तक हंगामा शुरू हो गया. इस दौरान सड़कों व दीवारों पर पचीस से तीस देसी बम पटके गए. इसकी वजह से सड़कों पर चारों तरफ धुंआ ही धुंआ नजर आया. जब तक लोग कुछ समझते, कुछ लोगों ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी.

गोलियों की तड़तड़ाहट शुरू होते ही सड़कों पर दहशत फ़ैल गई. गनीमत यह रही कि पुलिस ने एहतियात के तौर पर पहले ही युनिवर्सिटी के बाहर के सभी रास्तों पर बैरीकेडिंग कर उस पर लोगों की आवाजाही रोक रखी थी. बमबाजी और फायरिंग के बाद पुलिस और आरएएफ ने लाठियां पटककर सड़कों के किनारे खड़े लोगों को भगाया.

छात्रसंघ चुनाव के लिए आज खासी गहमा- गहमी के बीच नामांकन पत्र दाखिल किये गए. इस बार के चुनाव के लिए तकरीबन सौ उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किये हैं. इनमे से अध्यक्ष और महामंत्री पद पर सबसे ज्यादा नामांकन हुए हैं. नामांकन के दौरान उम्मीदवारों ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया. यूनिवर्सिटी के ज़िम्मेदार लोगों के सामने ही लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों की धज्जियां उड़ाई गईं.

उम्मीदवारों ने लंबे-चौड़े जुलूस निकाले और अकेले नामिनेशन के दौरान ही लाखो रूपये खर्च कर डाले. तमाम उम्मीदवार दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ परचा दाखिल करने पहुंचे. प्रमुख प्रत्याशियों के उम्मीदवारों के समर्थक आमने-सामने होने पर कई बार आपस में टकरा भी गए. इस दौरान हंगामे व अफरा तफरी के हालत नजर आए. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को कई बार लाठियां भी पटकनी पड़ीं. इस बार मुख्य मुकाबला एबीवीपी, समाजवादी छात्रसभा और आइसा के ही पैनल के बीच होने की उम्मीद है. पिछले चुनाव में यहां उपाध्यक्ष को छोड़कर बाकी सभी पदों पर बीजेपी की छात्र इकाई एबीवीपी ने जीत दर्ज की थी.