कुछ करना होगा

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तुमको अब कुछ करना होगा, आगे  फिर बढऩा होगा।
राष्ट्र धर्म के निर्वाहन में, रण में फिर चलना होगा॥
पिछली सरकारों पर हर दिन, आप दहाड़ लगाते थे।
नहीं रहेगा आतंकवाद, जोर-जोर  चिल्लाते  थे॥
दिल्ली रहती है मौन इसे, ही हथियार बनाया था।
मन मोहन के मौन व्रत पर ,किस्सा खूब सुनाया था॥
चार सैनिकों की हत्या पर, अब क्यो मुंह बन्द किये है।
आपके  मंत्रियो  को  देखो, कैसी चुप साध लिये है॥
आखिर इतना होने पर भी ,कैसे तुम चुप बैठे हो।
देते हो मीडिया में बयान, हर दिन झूठे-झूठे हो
होता  विधाओं  का  रुदन, तुम  घर  नहीं जाते  हो।
करके गलत बयानबाजी,  उनको चुप कर जाते हो॥
अब तुम  इच्छाशक्ति दिखाओ, जोरदार प्रहार करो।
जिसने छीना  सिंदूरों को, उनका तुम संहार करो॥
धरती आज पुकार रही है, अपने वीर सपूतों को।
मृत्यु दण्ड मिलना चाहिए, मां के दुष्ट कपूतों को॥
अब और नहीं सहना चाहिये, घाटी के व्यभिचारों को।
छूट नही अब मिलनी चाहिए, इन आतंकी हत्यारों को।।
पिछली सरकारों से अब तुम, अंतर हमको दिखलाओ।
एक एक आतंकी की लाशें, इसी धरा पर  गड़वाओ
आर्य वंश के  वीर सपूत, क्रंदन अब बन्द कराओ।
जो सीमा पर  सीना ताने, उनको कब्र में दफनाओ॥
चार के बदले में चालीस ,लाशें कटवा सकते हो।

 

-अंजनी अमोघ, प्रतापगढ़

मो. नं.-9792869800