जिला अस्पताल के बच्चे वार्ड में यमराज लगाते है मरीजो के साथ अपनी ड्यूटी, स्टॉप करता है आराम

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रायबरेली। प्रदेश सरकार व जिलाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद भी जिला चिकित्सालय की बच्चे वार्ड के स्टाफ व्यवस्था व हालत सुधारने में निष्क्रिय साबित हो रहे है।सीएमओ हों या सीएमएस, डॉक्टर के आदेश नर्से नही मानती है।

पिछले चार दिनों से जिले में भयानक गर्मी से लोग जूझ रहे है और इसी गर्मी में सबसे बुरी हालत जिला चिकित्सालय के बच्चे वार्ड की है,यहां पिछले कई दिनों से कूलर, पंखे नही चलाये जा रहे है।अगर चल भी रहे तो केवल रेंग रहे है जिससे मरीजो के साथ ही नवजात शिशुओं की हालत खराब हो रही है।तीमारदार अपने स्वयं के संसाधनों से गर्मी से निजात पा रहे है।

बीती रात एक अर्जेंट केस फुरसतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रिफर होकर रायबरेली आया।जिसके पर्चे पर तुरन्त बच्चे का डॉ0 को दिखाना लिखा हुआ था बच्चे को भर्ती तो कर दिया गया लेकिन नर्स ने डॉक्टर को काल करके नही बुलवाया जिससे बच्चे की हालत हर पल बिगड़ती जा रही थी तभी मामले की जानकारी कंचन टुडे टीम को हुई तत्काल टीम ने अस्पताल में बच्चे वार्ड में पहुचकर भर्ती बच्चे के बारे में जाना तो पता चला कि एक घण्टे बीतने को है लेकिन डॉक्टर नही आये देखने वही जानकारी करने पर पता चला कि नर्स ने डॉक्टर को काल ही नही किया था जिसके बाद मीडिया ने उच्च अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दी जिसके बाद बच्चे को महिला अस्पताल में kmc यूनिट ट्रांसफर कर दिया गया वही बच्चे वार्ड की जो स्थिति मीडिया ने देखी वो बहुत ही भयानक थी वार्ड में लगे कूलर चल ही नही रहे थे पंखे चल रहे थे तो वो भी कछुआ की चाल, AC चल रही थी केवल गर्म हवाओं के साथ जिससे मरीज के भर्ती बच्चो को काफी दिक्कत हो रही थी।

आप वीडियो में देख सकते है कि कितनी बड़ी लापरवाही वार्ड में तैनात नर्सो द्वारा किया जा रहा था शायद वार्ड में गरीबो की सुनवाई नही की जाती है गरीब मरीज टहलता रहे जच्चा मरे या बच्चा इससे अस्पताल प्रशासन को कोई लेना देना नही।

यदि ऐसी ही स्थिति रही तो आम जनमानस का क्या होगा, नर्सो की ये लापरवाही कोई पहली लापरवाही नही है इससे पहले भी कई मामले अस्पताल में हो चुके है लेकिन कभी कोई कार्यवाही नही की गई केवल मामलों को जाँच करवाने के नाम पर ठंडे बस्ते में भेजवा दिया गया ।

क्या ऐसी लापरवाही हमेशा होती रहेगी गरीब आदमी इसी तरह पिसता रहेगा ,अब देखना ये है उच्च अधिकारियों द्वारा इस मामले में क्या कार्यवाही करी जाती है।

अनुज मौर्य रिपोर्ट