जेल से छूटने के बाद बोले चंद्रशेखर, 2019 में चुनाव लड़ने का इरादा नहीं, बीजेपी को हटाना है लक्ष्य

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खुद चुनाव न लड़ने का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी को हटाना ही एकमात्र लक्ष्य है. बीजेपी को हराने के लिये भीम आर्मी महागठबंधन का समर्थन करेगी. उन्होंने कहा कि वह सुनिश्चत करेंगे कि बीजेपी की 2019 के लोकसभा चुनावों में हार हो.

लखनऊ: भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद जेल से रिहा हो गए हैं. जेल से बाहर आते ही उन्होंने बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने की बात कही है. खुद चुनाव न लड़ने का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी को हटाना ही एकमात्र लक्ष्य है. बीजेपी को हराने के लिये भीम आर्मी महागठबंधन का समर्थन करेगी. उन्होंने कहा कि वह सुनिश्चत करेंगे कि बीजेपी की 2019 के लोकसभा चुनावों में हार हो.

उनका कहना है कि भीम आर्मी सरकार के दबाव में नहीं झुकेगी और बीजेपी को आम चुनावों में सत्ता से बाहर खदेड़ने के लिये संवैधानिक तरीके से लड़ेगी. आजाद ने कहा कि हम समाज को संगठित कर जुल्म का मुकाबला करेंगे. वहीं मायावती को बुआ बताते हुए आजाद ने कहा कि उनसे कोई विरोध नहीं है, वो समाज के लिये ईमानदार हैं.जो लोग सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहे हैं उनके खिलाफ भीम आर्मी खड़ी होगी.

चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘यह हमारे अधिकारों के लिये बेहद लंबी संवैधानिक लड़ाई है. यह असली लड़ाई का वक्त है. नेता के अभाव में भीम आर्मी कमजोर पड़ती दिख रही थी लेकिन अब मैं लौट आया हूं.’’

आजाद ने कहा कि जेल में उन्हें ‘‘सूखी रोटियां’’ दी गईं और उसके परिवार को उससे मिलने नहीं दिया गया.मैंने जो कुछ भुगता है मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि बीजेपी को सूद समेत उसे 2019 के लोक सभा चुनाव में वापस करूं.’’

आजाद को पिछले साल आठ जून को हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ्तार किया गया था. सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में पांच मई को हुई हिंसा के सिलसिले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी. इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई थी जबकि 16 अन्य घायल हुए थे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो नवंबर 2017 को उसे जमानत दे दी थी. पुलिस ने हालांकि उसकी रिहाई से कुछ दिनों पहले ही उसके खिलाफ सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मामला दर्ज कर दिया. उसे रासुका के तहत एक नवंबर तक हिरासत में रखा जाना था.

उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के एक प्रवक्ता ने लखनऊ में कहा, ‘‘चंद्रशेखर की मां के प्रतिवेदन के बाद, उसे जल्दी रिहा करने का फैसला लिया गया. उसे एक नवंबर तक जेल में रहना था.’’

रासुका के विरोध में भीम आर्मी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर 14 सितंबर को सुनवाई होनी थी लेकिन सरकार ने 13 सितंबर की रात को ही चंद्रशेखर को रिहा कर दिया.