ट्रेन में बैठे-बैठे देखें मूवी, सुने गानें! भारतीय रेलवे अपने यात्रियों को देगा वाईफाई की सौगात

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जल्द ही राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस में सफर करने वाले पैसेंजर वाईफाई की मदद से अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट पर प्री-लोडेड सामग्री चला सकेंगे.

नई दिल्ली: वैसे तो भारतीय रेल अपनी लेटलतीफी और अव्यवस्था के लिए बदनाम है लेकिन रेलवे अब अपनी इस छवि को बदलने की कोशिश कर रहा है. जल्द ही राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस में सफर करने वाले पैसेंजर वाईफाई की मदद से अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट पर प्री-लोडेड सामग्री चला सकेंगे. फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और गातिमान एक्सप्रेस में वाईफाई की सुविधा दी जाएगी. प्रीमियम ट्रेनों में वाईफाई हॉटस्पॉट स्थापित करने की यह परियोजना जल्द ही शुरू हो जाएगी और इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे.

काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पर किया गया था प्रयोग
बताया जा रहा है यह परियोजना पिछले साल ऑपरेशन स्वर्ण जिसमें दिल्ली काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पर किए गए प्रयोग का एक विस्तार है. इसमें यात्रियों को वाई-फाई हॉटस्पॉट और प्री-लोडेड सामग्री को स्ट्रीम करने की अनुमति दी जाएगी. इस योजना के अंतिम रूप पर वाणिज्यिक विभाग फैसला लेगा, जो इस योजना से राजस्व अर्जित करने की उम्मीद कर रहा है.

तेजस एक्सप्रेस में रहा है कड़वा अनुभव
इससे पहले इस योजना को तेजस एक्सप्रेस में लागू किया गया था लेकिन वह भारत सरकार को लिए काफी कड़वा अनुभव रहा था. लॉन्च होने के कुछ दिनों के भीतर, मुंबई-गोवा तेजस एक्सप्रेस में लगी हुई एलसीडी स्क्रीन को यात्रियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था और हेडफोन चोरी हो गए थे. जिसके बाद रेलवे के एक अधिकारी ने कहा था, “भारतीय रेलवे मरम्मत और हेडफोन की लागत को बरकरार नहीं रख सकता है इसलिए रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया है कि किसी भी तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों में एलसीडी स्क्रीन नहीं होगी.”

यात्रियों के भुगतान पर नहीं लिया गया है फैसला
रेलवे के अधिकारी से जब यह पूछा गया कि क्या यात्रियों को इस सेवा का लाभ लेने के लिए भुगतान करना होगा तो उन्होनें कहा इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है. अधिकारी ने बताया, “वाणिज्यिक विभाग इस वाईफाई हॉटस्पॉट परियोजना से राजस्व इकट्ठा करना चाहता है, इसलिए यात्रियों को सुविधा के लिए भुगतान करने के लिए कहा जाएगा, या फिर विक्रेता सामग्री में विज्ञापनों के जरिए शुल्क लिया जाएगा और यह राजस्व रेलवे के साथ साझा किया जाएगा.