थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के नियम बदले, जानें कितना बढ़ा आपके 2 व्हीलर, 4 व्हीलर इंश्योरेंस पर प्रीमियम

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टू व्हीलर वाहनों के मामले में लॉन्ग टर्म इंश्योरेंश पॉलिसी लेना फायदा का सौदा है, क्योंकि टू व्हीलर वाहन के लिए इंश्योरेंस रिन्यू कराने की दर काफी कम है.

नई दिल्लीः कुछ वक्त पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सभी टू व्हीलर और फोर व्हीलर वाहनों के लिए 3 और 5 साल का इंश्योरेंस लेना अनिवार्य कर दिया है. इस लॉन्ग टर्म प्रीमियम पेमेंट्स की वजह से नई कार या बाइक खरीदने पर आपको पहले से ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इरडा ने सभी बीमा कंपनियों को आदेश जारी कर नई कार और बाइक के लिए तीन और पांच साल का थर्ड पार्टी लायबिलिटी कवर देने के लिए कहा है. इस आदेश से पहले की तुलना में ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम देना पड़ेगा पर इससे हर साल इंश्योरेंस रिन्यू कराने का झंझट खत्म हो जाएगा.

आज के वक्त में जब महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद इंश्योरेंस का खर्च काफी बढ़ गया है. ऐसे में सही इंश्योरेंस पॉलिसी का सलेक्शन करना बहुत जरूरी हो गया है. टू व्हीलर वाहनों के मामले में लॉन्ग टर्म इंश्योरेंश पॉलिसी लेना फायदा का सौदा है, क्योंकि टू व्हीलर वाहन के लिए इंश्योरेंस रिन्यू कराने की दर काफी कम है. लेकिन कार मालिकों के लिए यह उतना फायदेमंद नहीं है. क्योंकि इस पॉलिसी से कार की लागत बढ़ेगी साथ ही कार मालिकों को एडिशनल बेनेफिट्स भी नहीं मिलेंगे.

क्या है आपके लिए नया प्रीमियम खर्च
2 व्हीलर के मामले में पांच साल का थर्ड पार्टी बीमा लागत 75 सीसी से कम इंजन शक्ति के लिए 1045 रुपये, 75-150 सीसी के लिए 3285 रुपये, 150-350 सीसी के लिए 5453 रुपये और 350 सीसी से अधिक के लिए 13,034 रुपये होगा.

4 व्हीलर के मामले में तीन साल की लंबी अवधि का थर्ड पार्टी बीमा 1000 सीसी से कम इंजन वाले वाहनों के लिए 5286 रुपये, 1000-1500 सीसी के लिए 9534 रुपये और 1500 सीसी से अधिक के वाहनों के लिए 24,305 रुपये होगा.

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है
मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य रखा गया है. वाहन की चोरी, नुकसान होने सहित वृहद बीमा के तहत वाहन खरीदार के लिये बीमा एक साल के लिये या तीन साल के लिये खरीदने का विकल्प है. दुपहिया के मामले में पांच साल का विकल्प है. इरडा ने कहा है कि इन लॉन्ग टर्म बीमा पॉलिसियों से प्रीमियम में कमी आएगी साथ ही पॉलिसी होलडर्स को और भी कई फायदे होंगे. इस पॉलिसी की वजह से अब पॉलिसी को हर साल रिन्यू नहीं करवाना पढ़ेगा. इसके अलावा इससे प्रीमियम की दरें भी स्थिर होंगी जिससे वाहन पॉलिसी प्रीमियम की बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से छुटकारा मिलेगा.