दूसरों की पहचान बनाने में भी शान

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  • रेनू सैनी
    प्रत्येक व्यक्ति अपनी पहचान बनाने को आतुर रहता है। ऐसे में आप हैरान हो रहे होंगे न कि भला हम दूसरों की पहचान क्यों बनाएं? अपनी ही पहचान को सुदृढ़ क्यों न करें? अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं तो रुक जाइए और अपनी सोच पर यहीं विराम लगा दीजिए क्योंकि ऐसी सोच प्रगति का नहीं वरन अवनति का मार्ग होती है। जो व्यक्ति दूसरे की पहचान बनाने के लिए प्रयासरत रहता है, वह स्वयं भी सफल ही होता है। बेहद सफल व्यक्ति हमेशा दूसरों को सफल बनाने की ओर अग्रसर रहता है। वह लोगों को नकल करके सफल होने के बजाय अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बनाने के लिए बल देता है। नकल करके सफलता प्राप्त नहीं हो सकती जबकि सृजनता और मौलिकता के माध्यम से विश्व में अपनी अमिट पहचान बनाई जा सकती है। व्यक्ति को हर चीज हासिल हो सकती है बशर्ते वह अपनी योग्यता के अनुसार अपनी पहचान बनाने की सामर्थ्य रखता हो। अपनी पहचान बनाने के लिए व्यक्ति में आत्मविश्वास, सच्चाई और साहस, इन तीन तत्वों का होना अनिवार्य है। यदि किसी भी व्यक्ति में ये तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हैं तो वह हर शिखर को प्राप्त कर सकता है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में अनूठा है, अद्भुत है। प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताएं, परिवेश और रुचियां एक-दूसरे से भिन्न हैं। एक व्यक्ति विपन्नता में भी अपनी योग्यताओं से विश्व में अपना परचम फहरा सकता है तो वहीं दूसरी ओर एक संपन्न व्यक्ति अयोग्य होने पर जो है, उसको भी गंवा सकता है और अपनी पहचान भी मिटा सकता है। अपनी पहचान खुद बनाने का जज्बा एक व्यक्ति में बचपन से ही होना चाहिए। इरविंग बर्लिन अमेरिका के प्रसिद्ध गीतकार एवं संगीतकार थे। वे जो भी लिखते थे तुरंत लोगों की जुबान पर चढ़ जाता था। जॉर्ज गर्शविन एक संघर्षशील युवा गीतकार थे। वे इरविंग के बहुत बड़े फैन थे। संयोगवश एक दिन कार्यक्रम में उन्होंने इरविंग को देखा। उन दिनों गर्शविन मात्र पैंतीस डॉलर प्रति सप्ताह पर टिन पैन एली में काम कर रहे थे। इरविंग गर्शविन से बात करके बेहद प्रभावित हुए। कुछ देर बाद वे गर्शविन से बोले, ‘तुममें बेहद प्रतिभा है। मैं तुम्हें इसी समय अपना संगीत सचिव बनाने का प्रस्ताव रखता हूं। अचानक मिले प्रस्ताव से जॉर्ज गर्शविन अवाक रह गए। इरविंग ने उन्हें जितनी तनख्खाह बताई, वे इस समय उन्हें गीत लिखकर मिलने वाली कमाई से तीन गुना से भी अधिक थी। जॉर्ज इस सुनहरे अवसर को स्वीकार करने के लिए हां करने ही वाले थे कि तभी इरविंग बोले, ‘जॉर्ज, मेरी सलाह है कि तुम यह प्रस्ताव स्वीकार मत करो। अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम दूसरे दर्जे के बर्लिन बनकर रह जाओगे। लेकिन अगर तुम अपने बुनियादी वजूद पर डटे रहोगे तो किसी न किसी दिन तुम पहले दर्जे के गर्शविन जरूर बन जाओगे। बहरहाल उन्होंने इरविंग की बात मानकर इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और दिन-रात अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते रहे। परिणामस्वरूप एक दिन ऐसा आया कि गर्शविन ने अपनी ऐसी पहचान बना ली कि वे इरविंग से भी अधिक प्रसिद्ध हो गए। उन्होंने अमेरिकी पॉप म्यूजिक को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। उन्होंने इरविंग को नमन करते हुए कहा कि काश इरविंग बर्लिन जैसे व्यक्तित्व इस पृथ्वी पर दो-चार भी हो जाएं तो अनेक प्रतिभाओं को नए आयाम मिल जाएं और वे अपनी पहचान खुद बनाएं।विंस्टन चर्चिल का भी कहना था कि, ‘मैंने पाया है कि सामने वाले को कोई गुण सिखाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उस पर गुण मढ़ दिया जाए। ऐसा करने से व्यक्ति के अंदर मौलिकता का जन्म होने लगता है और वह अपनी तरकीबों और कार्यों से कामयाबी की ओर कदम बढ़ाता है। दूसरे व्यक्ति के द्वारा की गई प्रशंसा व्यक्ति के अंदर उत्साह एवं कार्य क्षमता की गति को कई गुना बढ़ा देती है।दूसरे की पहचान बनाने से व्यक्ति स्वयं की नजऱों में तो संतुष्ट होता ही है, इसके अलावा वह अन्य लोगों के हृदयों में भी सरलता से स्थान बना लेता है। आज ईर्ष्या, आपाधापी और प्रतिस्पर्धा के वातावरण में तो यह और भी जरूरी है कि लोगों को ऐसी शिक्षा प्रदान की जाए, जिससे वे एक-दूसरे की पहचान बनाने के लिए उनकी मदद करें। ऐसा करने से मानवीयता को नए आयाम मिलेंगे और विश्व बंधुत्व की भावना साकार होगी।रॉल्फ वॉल्डो इमर्सन कहते हैं कि, ‘जीवन में हमारी मुख्य आवश्यकता उस व्यक्ति की होती है, जो हमसे वह सब कराए, जो हम कर सकते हैं। तो आप किसी व्यक्ति की पहचान बनाने के लिए कब तैयार हो रहे हैं। अभी से अच्छा कोई समय नहीं होता।