नसीहत से ज्ञान

81
एक बार सूफ़ी संत जू उल नून अपने कुछ साथियों के साथ वन में विचरण कर रहे थे। जू एक नहर पर वुजू करने गए। पास ही एक महल की अटारी पर एक सुंदरी खड़ी उन्हें निहार रही थी। जू ने पूछा-क्या आप कुछ कहना चाहती हैं। वह बोली- ऐ पाक आत्मा, जब मैंने आपको देखा तो लगा कि कोई दीवाना है, मगर पास से देखने पर तुम विद्वान जैसे दिखाई दिए। बिल्कुल नज़दीक आने पर पाया कि आप तो ब्रह्म ज्ञानी लगते हैं। मगर अब समझ आया कि आप न तो दीवाने हो, न विद्वान और न ही ब्रह्म ज्ञानी। जू ने पूछा-आपके इन सब अनुमानों का क्या कारण है। तब उसने समझाया-अगर तुम दीवाने होते तो वुजू न करते। विद्वान होते तो पराई औरत को न देखते और ब्रह्म ज्ञानी होते तो अल्लाह के सिवा किसी और पर ध्यान न देकर अपने काम से काम रखते। जू उल नून ने इसे अपने लिए ख़ुदाई नसीहत समझकर पूरा जीवन ख़ुदा की राह में लगा दिया।
प्रस्तुति : मुकेश जैन