पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एनजीओ को देश छोड़ कर जाने को कहा

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पाकिस्तान सरकार ने देश के अंदर काम कर रहे अंतरराष्ट्रीय संगठनों (एनजीओ) को 60 दिनों के अंदर देश छोड़कर जाने को कहा है.

उन्हें अपने सभी काम भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं.

इस फ़ैसले से प्रभावित संगठन ‘एक्शन एड’ ने कहा है कि सरकार का यह फ़ैसला सिविल सोसाइटी पर किए जा रहे हमले की श्रृंखला का हिस्सा है.

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है.

सरकार की तरफ से एक्शन एड को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वो छह महीने में दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकता है.

सरकार का यह फ़ैसला तब आया है जब देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले और प्रेस की अभिव्यक्ति पर अंकुश की घटनाएं बढ़ी हैं.

क्यों उठाया गया यह क़दम

पाकिस्तान की ख़ुफिया एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय संगठनों को संदेह की दृष्टि से देखती हैं. साल 2011 में अमरीका की सीआईए ने ओसामा बिन लादेन की खोज के लिए फ़र्ज़ी टीकाकरण अभियान चलाया था.

पाकिस्तान के अधिकारियों ने ‘सेव द चिल्ड्रन’ पर इस फर्जीवाड़े का आरोप लगाया था, हालांकि संगठन ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को ग़लत ठहराया था.

एक्शन एड सहित अन्य कई अंतरराष्ट्रीय एनजीओ को दिसंबर 2017 में देश छोड़ कर जाने को कहा गया था, लेकिन पश्चिमी सरकारों के दबाव के चलते पाकिस्तान को फ़ैसला बदलना पड़ा था.

एक्शन एड और प्लान इंटरनेशनल ने देश छोड़कर जाने के आदेश वाले पत्र मिलने की पुष्टि की है. संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ अपील भी की थी पर इसे ख़ारिज कर दिया गया.