रामजानकी मन्दिर से जगदीप बेदखल, बैंक खातों पर लगी रोक

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Raebareli News: रामजानकी मंदिर

रायबरेली। रामजानकी मंदिर का मामला दिन प्रतिदिन तूल पकड़ रहा है। अब एक आदेश भी विकास द्वीप स्थित कार्यालय से पीडि़ता के पक्ष में हो गया है। जिसमें डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा न केवल जगदीप कुमार को समिति से बेदखल किया जा चुका है बल्कि उनके बैंक खातों के संचालन पर भी रोक लगाई जा चुकी है। इसके बाद भी वह खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं। पीडि़ता का आरोप है कि इस आदेश का अनुपालन नहीं सुनिश्चित किया जा रहा है। अपनी ऊंची पहुंच के चलते जगदीप पूरे मामले को दबाने में जुटे हुए हैं। पीडि़ता ने उनकी शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
मामले में बताया गया कि डिप्टी रजिस्ट्रार फम्र्स सोसाइटीज एवं चिट्स लखनऊ मण्डल लखनऊ के डिप्टी रजिस्ट्रार उमाशंकर सिंह ने अपने छह अगस्त 2018 के निर्णय में लिखा है कि ‘वस्तु स्थिति यह है कि संस्था स्थापना के समय बनाये गये पदाधिकारी व सदस्यों की महत्ता तब तक ही थी, जब तक संस्थापक अध्यक्ष जीवित रहे। संस्थापक अध्यक्ष ने अपने जीवन काल में जिन आशंकाओं को व्यक्त किया था, उन आशंकाओं के क्रम में ही कार्यवाही स पादित होना परिलक्षित होता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि संस्थापक अध्यक्ष की मृत्यु के उपरान्त संस्था संविधान के उपबन्धों की अनदेखी की गयी और संस्था का संचालन मनमाने ढंग से किया जाने लगा। यह भी आश्चर्यजनक है कि संस्था संविधान में कूटरचना कर एसे प्राविधान रख दिये गये, जो किसी भी दृष्टि से न तो प्रजातांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल हैं और न ही संस्था हित में। संस्था जिन पवित्र उद्देश्यों को लेकर संस्थापक अध्यक्ष द्वारा स्थापित की गयी थी, उनकी प्रतिपूर्ति हेतु कृत किसी भी कार्यवाही का प्रतिदर्शन संस्था सम्बन्धी वर्तमान अभिलेखों में नहीं होता। वर्तमान पदाधिकारियों द्वारा निर्मित अभिलेखों में भौतिक रूप से कई विसंगतियां हैं, क्योंकि ऐसी किसी भी कार्यवाही की प्रविष्टि नहीं है जो संस्था संविधान के प्राविधानों के अनुरूप सम्पादित की गयी हो। संस्था के वित्तीय अभिलेखों को भी मनमाने ढंग से तैयार किया गया है, जिनमें की गयी प्रविष्टियां अधूरी हैं। संस्था को प्राप्त समस्त आय का विवरण वित्तीय अभिलेखों में दर्ज नहीं है और न ही  उनको पारदर्शी बनाने का प्रयास ही किया गया है। यह पूर्णतया सम्भाव्य है कि संस्था आय की बड़ी धनराशि जगदीप कुमार अपने हित में प्रयुक्त कर रहे हों। ऐसी स्थिति में यह औचित्यपूर्ण है कि संस्था से सम्बन्धित खातों, जिनका संचालन व्यक्तिगत रूप से जगदीप स्वयं करते हैं, के व्यवहरण को संस्था हित में तत्काल प्रभाव से अवरूद्ध कर दिया जाये। अत: बैंक आफ बड़ौदा, बछरांवा में संचालित खाता सं या-0560100008628 एवं जिला सहकारी बैंक, टाउन एरिया, महराजगंज में संचालित खाता सं या-7524 के संचालन को तत्कालिक प्रभाव से अवरूद्ध किया जाता है।’ आदेश में यह भी लिख गया है कि वर्णित तथ्यों के आलोक में यह प्रतिपादित होता है कि जगदीप कुमार द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संस्था के प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण कराया गया और व कूट रचना कर संस्था संविधान में परिवर्तन किया गया। संस्था संविधान का यह प्राविधान कि संस्थापक अध्यक्ष की मृत्यु के बाद उसके भतीजे ही अध्यक्ष होंगे, नितान्त असंगत, अव्यवहारिक व अप्रजातांत्रिक है। निश्चित रूप से कौशिल्या देवी द्वारा दर्ज करायी गयी आपत्तियों में बल है, जो यह प्रमाणित करती है कि जगदीप कुमार ने जानबूझकर संस्था हड़पने की नियत से संस्था की मूल कार्यकारिणी को परिवर्तित कर दिया। कार्यालय द्वारा की गयी जांच में अनेक वित्तीय अनियमितताएं पायी गयीं, जो प्रमाणित करती हैं कि जगदीप कुमार ने अपने हित में संस्था का संचालन किया है। इसलिए संस्था का पंजीयन प्रमाण-पत्र सं या-3168/1982-1983 दिनांक 20-01-1983 एवं जगदीप कुमार द्वारा कराया गया, उसका नवीनीकरण प्रमाण-पत्र सं या-613/2005 दिनांक 28-07-2005 को निरस्त किया जाता है। डिप्टी रजिस्ट्रार फम्र्स सोसायटी एण्ड चिट्स लखनऊ मण्डल के इस निर्णय के विरूद्ध जगदीप कुमार की ओर से न्यायालय आयुक्त लखनऊ, मण्डल लखनऊ में अपील दायर की गयी। इस अपील पर आयुक्त ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन जगदीप को संस्था का अध्यक्ष नहीं माना है। यहां से भी उन्हें कोई बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता ओपी यादव ने कहा कि प्रकरण में पीडि़ता को हरहाल में न्याय दिया जायेगा।