लापरवाही से हुई मूक-बघिर प्रसूता व उसके बच्चे की मौत

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चिकित्सक व स्टाफ नर्स पर परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
महाराजगंज (रायबरेली)। चिकित्सकों की उदासीनता और स्टाफ नर्स की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की सीएचसी में दर्दनाक मौत हो गई। मौत के बाद मूक-बघिर प्रसूता के परिजनों ने सीएचसी में जमकर हंगामा काटा। परिजन लापरवाह डॉक्टर और स्टाफ नर्स पर कार्यवाही की मांग कर रहे थे। सूचना पर शहर कोतवाल राकेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे उन्होंने परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाकर समझाया और प्रसूता के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के अनुसार शिवगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत पारा कला की रहने वाली मूक-बघिर लक्ष्मी (30) पत्नी सर्वेश गर्भवती थी। रविवार की सुबह आशा बहू महिमा पांडेय 102 एंबुलेंस से प्रसूता को सीएससी लाई थी। जहां उसकी और उसके बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। चिकित्सकों के अनुसार प्रसूता का बच्चा आउट था। जिसकी वजह से प्रसूता की मौत हुई। प्रसूता की मौत के बाद पहुंचे परिजनों ने सीएससी में जमकर हंगामा काटा और दोषी चिकित्सकों और स्टाफ नर्स पर कार्यवाही की मांग की। परिजनों का आरोप है कि महिला बहुत गरीब थी वह न तो बाहर की दवा ले सकती थी और न ही किसी नर्स व डाक्टर को फीस दे सकती थी। इसीलिए उसे ठीक से नहीं देखा गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को न्याय का आश्वासन देकर समझाया-बुझाया और प्रसूता के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल ने बताया कि तहरीर के अनुसार जांचकर कार्रवाई की जायेगी।

महिला चिकित्सक की भी लापरवाही
महराजगंज। इससे पहले प्रसूता बीती नौ जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महाराजगंज आई थी। वहां उसने महिला चिकित्सक पूनम सिंह को दिखाया था। पूनम सिंह ने अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतते हुए प्रसूता को ठीक से नहीं देखा और न ही अल्ट्रासाउंड हुआ जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने फॉर्मेलिटी अदा कर प्रसूता से कहा कि अभी बच्चा होने में काफी समय है। यह कहकर महिला चिकित्सक पूनम सिंह ने प्रसूता लक्ष्मी को वापस भेज दिया। महिला चिकित्सक की भी मामले में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। आखिकार जिस डाक्टर पर भगवान से भी ज्यादा विश्वास करके मरीज जाते हैं वही डाक्टर अपने दायित्वों के प्रति क्यों उदासीन हो जाते हैं?

नर्स ने कहा था-अभी लेट है बच्चा
महराजगंज। प्रसूता लक्ष्मी शनिवार की दोपहर दो बजे के आसपास सीएचसी आई थी। उसे लूज मोशन की शिकायत थी। उन्होंने डॉक्टर भावेश को दिखाया था। क्योंकि लक्ष्मी गर्भवती थी इसलिए डॉक्टर भावेश ने लूज मोशन की दवा लिखने के बाद महिला चिकित्सक या स्टाफ नर्स को दिखाने की सलाह दी। इसके बाद प्रसूता ऊपर स्टाफ नर्स स्वाती श्रीवास्तव के पास पहुंची। स्वाती श्रीवास्तव ने महिला को ठीक से देखा भी नहीं और कहा कि अभी बच्चे का समय नहीं है। यह कहकर उसे वापस भेज दिया। अगर स्टाफ नर्स ने पूरी जि मेदारी के साथ प्रसूता को देखा होता तो शायद जच्चा-बच्चा की जान बच जाती।