Gaganyaan मिशन में इसरो के साथ मिलकर काम करना चाहती है नासा

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भारत के ह्मूयमन स्पेस मिशन प्रोग्राम में अमेरिका मिलकर काम करना चाहता है.

भारत के ह्मूयमन स्पेस मिशन प्रोग्राम में अमेरिका मिलकर काम करना चाहता है. नासा के पूर्व एडमिनिस्ट्रेटर मेजर जनरल चार्ल्स फ्रैंक बोल्डन जूनियर ने कहा कि इस प्रोग्राम के लिए भारत के साथ मिलकर अमेरिका एक वर्किंग ग्रुप बनाना चाहता है. फ्रैंक बोल्डन के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच स्पेस मिशन के मामले में मजबूत संबंध रहे हैं और साथ मिलकर काम भी कर चुके हैं. भारतीय ह्यूमन स्पेस प्रोजेक्ट में अमेरिका की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल में उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें लगता है इसरो प्रमुख डॉ सिवान नासा के एडमिनिस्ट्रेटर और नासा एडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्रिडेंस्टीन के बीच इस मिशन को लेकर बातचीत हो रही है और इसके लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा.

पहले भी मानवीय मिशन के लिए कह चुका

फ्रैंक बोल्डन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका लगातार भारत को ह्यूमन स्पेस प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कह रहा था लेकिन उस समय भारत इसके लिए तैयार नहीं था. बोल्डन के मुताबिक भारत ने अब मानवीय मिशन शुरू करने का निर्णय ले लिया है.

अंतरिक्ष में तीन एस्ट्रोनॉट भेजने का प्रोजेक्ट

भारत के नेशनल स्पेस इंस्टीट्यूट इसरो ने 2022 तक तीन एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजने की योजना तैयार की है. इस मिशन को गगनयान नाम दिया गया है.

एस्ट्रोनॉट को प्रशिक्षण दे सकती है नासा

बोल्टन के मुताबिक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को प्रशिक्षण देने में मदद कर सकती है. नासा अपने अनुभवों और ट्रेनिंग फैसिलिटीज का उपयोग करने का मौका दे सकती है. फिक्की द्वारा आयोजित एक इंटरेक्टिव सेसन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का अंतरिक्ष मिशन में साथ काम करना साझा रिस्क और रिवार्ड का है. इस कार्यक्रम में इसरो के फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के चेयरमैन एएस किरन कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भारत की पहचान मजबूत हो रही है और इस भरोसे से इसरो व नासा को मिलकर साथ मिलकर काम करने में मदद मिलती है.