GST: छूट की सीमा बढ़ने से 10 लाख कारोबारियों को होगा फायदा: CAIT

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यह फैसला दर्शाता है कि सरकार छोटे कारोबारियों की समस्याओं को सुलझाने के प्रति सजग है और प्रणाली को सरल बनाना चाहती है.

कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने जीएसटी काउंसिल द्वारा जीएसटी में दी गई छूटों का स्वागत किया है. साथ ही कहा है कि यह फैसला दर्शाता है कि सरकार छोटे कारोबारियों की समस्याओं को सुलझाने के प्रति सजग है और प्रणाली को सरल बनाना चाहती है.

काउंसिल की गुरुवार को हुई बैठक में छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी से छूट का दायरा बढ़ाकर 40 लाख रुपये सालाना कर दिया है. अभी यह लिमिट 20 लाख रुपये थी. वहीं छोटे राज्यों के लिए यह 10 लाख से बढ़कर 20 लाख रुपये हो गई है. इस कारण कई छोटे कारोबारी जीएसटी के दायरे से बाहर हो जाएंगे. वहीं, कम्पोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी है. नई कम्पोजिशन स्कीम 1 अप्रैल 2019 से लागू हो जाएगी.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और सेक्रेटरी जनरल प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी काउंसिल के इन फैसलों से निश्चित रूप से देश में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी. उनके सिर से टैक्स की जटिलताओं का बोझ काम होगा.

जीएसटी में छूट की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने से लगभग 10 लाख छोटे व्यापारी टैक्स के दायरे से बाहर हो सकते हैं, जो एक अच्छा संकेत है. बेहद कम कारोबार करने वाले छोटे कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है.

कंपोजीशन स्कीम की लिमिट बढ़ने से 20 लाख कारोबारियों को फायदा

उन्होंने कहा की कम्पोजीशन स्कीम की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने का निर्णय काफी समय से लंबित था और इस निर्णय से देशभर में लगभग 20 लाख से अधिक व्यापारियों को फायदा होगा. वहीं दूसरी ओर अब ऐसे व्यापारियों को केवल साल में एक बार ही रिटर्न भरना होगा. इससे इनको टैक्स अनुपालन के जंजाल से मुक्ति मिलेगी. हालांकि कर की अदायगी हर तिमाही में करनी होगी, जो कि तर्क संगत है.

सर्विस सेक्टर को ऐसे होगा फायदा

सर्विस सेक्टर के लिए कम्पोजीशन स्कीम की सीमा 50 लाख रखने के फैसले पर कैट के प्रमुखों ने कहा कि इससे लगभग 10 लाख से अधिक छोटे सर्विस प्रोवाइडर्स को लाभ मिलेगा. यह और भी तर्कसंगत है कि इनको 6 फीसदी के कर स्लैब में रखा गया है.

कुछ अन्य समस्याओं पर ध्यान देने की है जरूरत

भरतिया और खंडेलवाल ने यह भी कहा की व्यापारियों के कुछ अन्य विषयों पर सरकार का ध्यान जाना बेहद आवश्यक है. इसमें प्रमुख रूप से समय से व्यापारियों को रिफंड मिलना, ऑटो पार्ट्स, एल्युमीनियम के बर्तन आदि पर कर की दर को कम करना और रिटर्न को मासिक की जगह तिमाही फाइल करना आदि शामिल हैं.