तो रविवार को भी भूख व बीमारी से दो गौवंशो की हुई मौत, गौशाला में लगा गन्दगी का अंबार

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महराजगंज रायबरेली।
क्षेत्र की बखत खेर मजरे मोन में बनी गौशाला में जहां शनिवार को आधा दर्जन से अधिक गौवंशो की मौत हुई वहीं रविवार को भी भूख व बीमारी से बेहाल दो गौवंशों की मौत हो गई। वहीं सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने व समाचार पत्रों में मामले की खबर प्रकाशित होने के बाद पंचायत मंत्री ने दो ट्राली भूसे की व्यवस्था कराई है। भूसा आने से एक सप्ताह बाद भूख से तड़प रहे गौवंशों की भूख शांत हुई। लेकिन अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी साफ-सफाई न होने से कीचड़ व गंदगी में ही गौवंश रहने को मजबूर हैं।
बताते चलें कि लाखों की लगात से जिला पंचायत ने निर्माण कराने के बाद ही गौशाला संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सुपुर्द कर दी थी।250 गौवंशो की क्षमता वाली गौशाला में वर्तमान में लगभग 200 जानवर है। इनके रख-रखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन ग्राम प्रधान व पंचायत मंत्री के बीच विकास व अन्य कार्यों में आये मद को लेकर विवाद हो गया।जिसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन को भी है। इसी विवाद के चलते गौशाला में भूसा आदि की सप्लाई कर रहे व्यापारियों ने भी पूर्व में सप्लाई किए गए भूसे का भुगतान न होने से उधारी देना बंद कर दिया। जिससे एक सप्ताह पूर्व भूसा खत्म होने से गौशाला के गौचर भूख से तड़प रहे थे।जिसकी स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। शनिवार को आधा दर्जन से अधिक गौवंशो की मौत होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।जिसपर स्थानीय पत्रकारों सहित बीडीओ व पशु चिकित्सक ने भी संज्ञान लेते हुए मौके पर पहुंचे। वहां की स्थिति देख अधिकारी द्वय दंग रह गए। उन्होंने जेसीबी बुलवाकर मृत गौवंशों को दफनाने के साथ ही पंचायत सहायक व ग्राम प्रधान को भूसा मंगवाने के निर्देश दिए। रविवार को जहां दो ट्राली भूसे की व्यवस्था होने से एक सप्ताह से भूख से तड़प रहे गौवंशो की क्षुधा शांत हुई। वहीं कल के बीमार व भूख से तड़प रहे दो अन्य गौवंशो ने भी दम तोड दिया। लेकिन स्थानीय प्रशासन को मामले की भनक तक नहीं लगी और न ही गौवंशो की मौत के कारण की जांच हो सकी।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार ये सारी मौतें बदइंतजामी की वजह से हुई हैं। यहां काम कर रहे श्रमिकों को भी कई महीने से भुगतान नहीं मिला है। नाम न छापने की शर्त पर श्रमिकों ने बताया कि पंचायत से चारे की मांग की जाती रही, लेकिन एक सप्ताह पूर्व से ही भूसा खत्म होने पर भी ध्यान नहीं दिया गया। मामले में जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव ने बताया कि गौशाला में गायों की मौत और भुगतान न होने की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर इसी तरह से प्रशासनिक रवैया बना रहा तो गौशाला में गौवंश बेमौत मारे जाएंगे।

एडवोकेट अशोक यादव रिपोर्ट

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