रेल कोच की फैक्ट्री माॅर्डन और भेजे जा रहे बिना वाॅयरिंग के डिब्बे!

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रायबरेली। रेल मंत्रालय में अपने न बर बढ़ाने के लिए मार्डन रेल कोच फैक्ट्री लालगंज का प्रबंधन लापरवाही की सारी हदें पार कर रहा हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के चक्कर में आधे-अधूरे कोच कारखाने से डिस्पैच किये जा रहे हैं। रेल मंत्रालय को खुश करने के लिए इस फैक्ट्री के उच्च पदों पर आसीन अधिकारी कांग्रेस के गढ़ व सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में केन्द्र की भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री व रेल मंत्री की जमकर किरकिरी करा रहें हैं। आधुनिक रेल कोच कारखाने से डिस्पैच किये गये रेल डिब्बों की एक खेप जब रायबरेली रेलवे स्टेशन पहुंची तो कारखाने के लापरवाह प्रबन्धन की सारी पोल खुल गयी। रेलवे स्टेशन की वाॅशिंग लाइन में खड़े इन नवनिर्मित डिब्बों में से तीन डिब्बे ऐसे पाये गये जिनमें वायरिंग ही नहीं थी। न पंखा, न लाइट और न ही मोबाइल चार्ज करने वाला शाॅकेट। यह बात बाहर आयी तो मार्डन रेल कोच फैक्ट्री प्रबन्धन के हाथ-पांव फूल गये। आनन-फानन में फैक्ट्री से टेक्नीशियन व इलेक्ट्रीशियन की फौज के साथ कुछ अधिकारी पहुंचे और डिब्बों में वायरिंग के साथ पंखें, लाइट और शाॅकेट फिट कराये। रेल कोच फैक्ट्री इस लापरवाही को दबाने की मनगढ़ंत कहानी बनाती इससे पहले ही सारा मामला मीडिया के कैमरे में रिकार्ड हो गया। विपक्ष ने रेल मंत्रालय को फैक्ट्री के लापरवाहों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। जानकारी के मुताबिक आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना लालगंज से नवनिर्मित डिब्बों की एक खेप गंतव्य के लिए रवाना हुई। सबसे पहले यह खेप रायबरेली रेलवे स्टेशन पर 30 सित बर को सीडीओ ने रिसीव की। इसके बाद नवनिर्मित डिब्बे वॉशिंग लाइन लाये गये। इसी दौरान ही पता चला कि कोच सं या 726, 727 और 728 में विद्युत वायरिंग करना ही कारखाने के कारीगर भूल गयें हैं। यह बात पता चलते ही रेल कोच फैक्ट्री प्रबंधन सकते में आ गया। मामले को मीडिया से छुपाने का प्रयास करते हुए कारखाने से एक टीम भेज कर इन तीनों डिब्बों की वायरिंग कराई गयी। पंखे लगवाये गये, मोबाइल चार्ज करने वाले शाॅकेट और आॅन-आॅफ करने के लिए स्विच भी लगवाये गये। उत्पादन क्षमता में बड़ी वृद्धि दिखाने के चक्कर में लालगंज की रेल कोच फैक्ट्री द्वारा की गई यह अब तक की सबसे बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। कारखाने में डिब्बों के निर्मित होने के बाद बकायदे उनका हर स्तर पर निरीक्षण किया जाता है। इसके लिए विभाग भी बने हुए हैं। डिस्पैच करने के पहले भी अधिकारी बकायदे डिब्बों का निरीक्षण करते हैं। तब उन्हें भेजा जाता है। इसके बावजूद बिना निरीक्षण के ही डिब्बों का डिस्पैच किया जाना एक बड़ी लापरवाही है। कांग्रेस का गढ़ और सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण कोच फैक्ट्री की यह लापरवाही विपक्ष को सरकार घेरने का मौका दे रही है। विपक्ष का आरोप है कि केन्द्र सरकार व रेल मंत्रालय की खुशामद करने के चक्कर में अधिकारी मार्डन रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना के उद्देश्य को ही तार-तार कर रहें हैं। इस संबंध में रेल कोच फैक्ट्री से जुड़ा कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। जबकि कारखाने के पीआरओ दीपक कुमार के अनुसार ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है। इधर रायबरेली के कोचिंग डिपो अधिकारी एके वर्मा ने बताया कि उनका काम यह सब चेक करना नहीं है। उन्होंने माना कि यह एक बड़ी लापरवाही है, लेकिन यह भी कहा कि उनका कार्यक्षेत्र अलग है। स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार ने भी इसे एक बड़ी लापरवाही स्वीकारा। उन्होंने यह भी कहा कि यह अब तक की पहली बड़ी लापरवाही है। इस पूरे मामले में सबसे मजेदार बात तो यह है कि प्रकरण मीडिया के संज्ञान में आया तो मार्डन रेल कोच फैक्ट्री के पीआरओ दीपका कुमार ने एक प्रेस रिलीज जारी करके सफाई देनी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि कुछ पंखों में खराबी थी, जिसकी वजह से उन्हें सही करा दिया गया है।

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