“कुपीये नी कूपीये होए होए – सामान लूटिए होए होए”

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रायबरेली। सिक्खों में लोहड़ी का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास के साथ जिले में मनाया गया। जिले के सभी गुरुद्वारों में अरदास के बाद लकड़ी में अग्नि दी गई, इसमें समाज के लोगो ने प्रथा के अनुसार अग्नि में रेवड़ी, मूंगफली,तिल, चिरवा डाली ,इसमें आज गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व के साथ लोहड़ी का भी त्योहार था, इसी उपलक्ष्य में गुरद्वारे में प्रसाद में चाय पकोड़े,मीठाई का आयोजन किया गया था। जिसकी सेवा गुरमीत सिंह तनेजा, बलजीत सिंह मोंगा,ऋषि सिंह मोंगा ने की। तीनों को ज्ञानी जी ने सरोपा से सम्मानित भी किया।

लोहड़ी के पर्व में इसी वर्ष नव विवाहित जोड़े एवं इसी वर्ष जन्म हुए बच्चो के परिवार में विशेष तौर पर मनाया जाता है।

लोहड़ी पर्व में इसी परिवार में, समाज के छोटे छोटे बच्चे लोहड़ी मांगने जाते है,और गीत गाए जाते है,”कुपिये नी कूपिये होए होए”इसमें दूल्हा भट्ठी वाला से इतिहास भी जुड़ा है, कि उस समय युवतियों को जबरन उठा कर अमीर लोगों को बेच दिया जाता था। इसमें दूल्हा भट्ठी ने बहुत विरोध कर युवतियों को उनसे मुक्त कराकर अच्छे परिवारों में शादी करवाई थी। इसके उपरांत आतिश बाजी हुई। इसमें सोनू छाबरा,टीटू मोंगा, परमजीत तनेजा, करन दीप मोंगा,सोनू गांधी, सेठ सलूजा, त्रिलोचन सिंह नरूला,गुरदीप सिंह मोंगा आदि का सहयोग रहा।

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